जीवन का सत्यार्थ जानना

पहले तो हमें अंतर्दृष्टि करना होगा। यह जानना कि हमारी रुचियाँ क्या हैं, हम किस काम में उत्साहित होते हैं? इस ज्ञान के आधार पर ही हम अपने

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